0
Image credit :- Google




न जाने क्यू 
यादो मे तेरे चेहरे की परछाई आज भी है
ख़ामोशी मे तेरे आवाज की गुनगुनाहट आज भी है

न जाने क्यू

तन्हाई मे तेरे धडकनों की आहात आज भी है 
तेरे साथ दो कदम चलने की चाहत आज भी है

न जाने क्यू

हर लम्हे तेरी एक झलक की बेताबी आज भी है
पलकों को तेरे ही तसवुर की आदत आज भी है 

न जाने क्यू
तेरे साँसों मे सिमट जाने की ख्वाइश आज भी है
हर पल तुझे दिल तोड़ जाने की इजाजत आज भी है 


Post a Comment Blogger 0

 
Top