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अश्क..चाँद..के..!

आज एक ख्याल आया फिर बरबस इस दिल मैं, तनहा फिर हुआ मै भरी महफ़िल मैं. सोचा तू है एक उदासी या किसी की अधूरी ग़ज़ल, या मेरी ही तन्हाई का महज़ एक रुक हुआ पल. शर्मीला हो गया चाँद, बुरखे मैं बाहें अब बादल, दर्द इश्क मै देखा इतना , जितना विधवा की पलकों का बहता काजल. सुनाई कविता किसी तारे ने चांदनी को, हो गयी वो उसकी कायल, चाँद भी हो गया जब अकेला , बेदर्द दर्द भी हुआ तब घायल. रातों मै बिछ गयी रुसवाई , जब दिलों मै आई बेवफाई, इश्क चाँद से ही था चांदनी को , जाने क्यूँ लफ़्ज़ों मै न कह पाई. अश्क बहते हैं आज तक उसके,हम कहते उन्हें चाँद के दाग, इश्क हुआ था सदियों पहेले उसे, लगी है आज तक एक आग. सदियों तक बहें उसकी पलकें , भर गए सात समंदर, खोयी वही चांदनी है तू, इस चाँद सा मेरा दिल का मंज़र

दरमियाँ (In Between)! (with english translation)

मयस्सर नही है तेरी चाहत क़ी अक़ीदत पर इस दिल ने की है हर वक़्त बस क़ी है तेरी ही इबादत नक्श ही रह जाएँगा तेरा मेरे दिल के इन सुर्ख लबों पर पर तेरी ये तसलीम झिलमिल मुस्कुराहट ज़हेन मैं ज़हेर सियाह, भाया है इस काफिरों के इतना सियाह की तुझी मैं घुलता जा रहा हू ज़र्रों मैं कभी अमावस को तेरी आखो का काजल बना तो कभी तेरे पलाको पे सितारों को साज़ा जीने लगा हू बस अब तेरे सासो के दरमियाँ . English Translation (Some what):-  It’s not possible to get, faith of your Love But every-time my heart has worshiped just thou only vague Images of you will be left on this red lips of my heart but those peaceful glinting smile of yours is flowing like a poison, pleasingly inside my infidel soul in such an amount that, my molecules are going to dissolve in you Sometime making the dark of “New moon” your kohl even sometime embellishing stars on your feathery eyelid ‘M now just living in between your breath  P.S - Learning Urdu is so much fun and great ! ...

लफ्ज़... कुछ.मेरे.कुछ.तुम्हारे.!

इन होठों पे एक बात है …. पर उसके कुछ लफ्ज़ अब भी किसी के पास हैं…. ख्वाहिशों की डोर में बँधे हुए कुछ लफ्ज़ जो मेरे पास है… लफ्ज़ जो किसी के ख़यालों में खोए हैं … लफ्ज़ जो किसी के आँखों के खाब में सदियों से सोए नहीं है …. मेरे  लफ़ज़ो का एहसास उनको भी है…. समय की देहलीज़ पे ये राज़ मेरे साथ- साथ अब उनका भी है … सिमट के भी बिखरे से हैं ये लफ्ज़ उन्हे समेत के रखना है अपने पास अर्थ खोने के पहले    बाँटना है ... अपने साथ ... तुम्हारे साथ ... पर ना जाने क्यू आज ये सियाही की डिब्बी भी कुछ खाली सा है... मेरी ही तरह.. सायद इन लबज़ो की गिरहें में या तो समंदर है या खाई.. या बस एक तन्हा दिल की तनहाई...

न.. जाने...क्यू !

Image credit :- Google न जाने क्यू  यादो मे तेरे चेहरे की परछाई आज भी है ख़ामोशी मे तेरे आवाज की गुनगुनाहट आज भी है न जाने क्यू तन्हाई मे तेरे धडकनों की आहात आज भी है  तेरे साथ दो कदम चलने की चाहत आज भी है न जाने क्यू हर लम्हे तेरी एक झलक की बेताबी आज भी है पलकों को तेरे ही तसवुर की आदत आज भी है  न जाने क्यू तेरे साँसों मे सिमट जाने की ख्वाइश आज भी है हर पल तुझे दिल तोड़ जाने की इजाजत आज भी है 

काश..ऐसा..कुछ..!

काश मै ऐसा कुछ लिख पाता जो तेरे अश्कों को मोतियों मै बदल पाता काश फिर सारी रात तेरी पलकें देखता और सब कुछ भुला देता काश रूठ जाती मुझसे तू, फिर लफ़्ज़ों से तुझे मना पाता काश कसक लफ्जों से तेरे लबों को अपने लबों से मिला पाता काश तेरी उदासी मे इन्द्रधनुष के रंग मै तेरी तस्वीर मे भर पाता काश अपने शब्दों से संग तेरे लिए सावन हल्का सा ला पाता काश अल्फाजों की चांदनी से तेरे जुल्फों के बादल हटा पाता काश चार पंक्तियाँ लिखता और तुझको मैं खुद मे समां पाता

क्यू...तुम.. !

जब-2 तेरी यादो का साया लहराया मन मे हर बार बस एक ही ख़याल आया क्यू तेरी झील सी आखो से सिवा ये दिल कही और खोता नही क्यू तुझको देखे वग़ैर मेरा सुबह होता नही क्यू मेरी हर सांस मे है तेरा हिस्सा क्यू तेरे बिना ये ज़िंदगी है बस एक क़िस्सा क्यू तेरा वो बेपरवाह रहना और आखो से सब कहना तसाउर मे एहसास बन कर आता है क्यू ये एहसास हर बार मुझको तेरे पास ले जाता है वही तेरा मुस्करता चेहरा और बिखरा बिखरा मन बेकरारी मे भी करार दे जाता है जब-2 तेरी यादो का साया लहराया ना जाने क्यू वो तेरा हसीन साया घुलकर फ़िज़ा के आँचल मे तन्हाई मे भी एक खूबसूरत सज़ा दे जाता है !

अश्क..चाँद..के..!

आज एक ख्याल आया फिर बरबस इस दिल मैं, तनहा फिर हुआ मै भरी महफ़िल मैं. सोचा तू है एक उदासी या किसी की अधूरी ग़ज़ल, या मेरी ही तन्हाई का महज़ एक रुक हुआ पल. शर्मीला हो गया चाँद, बुरखे मैं बाहें अब बादल, दर्द इश्क मै देखा इतना , जितना विधवा की पलकों का बहता काजल. सुनाई कविता किसी तारे ने चांदनी को, हो गयी वो उसकी कायल, चाँद भी हो गया जब अकेला , बेदर्द दर्द भी हुआ तब घायल. रातों मै बिछ गयी रुसवाई , जब दिलों मै आई बेवफाई, इश्क चाँद से ही था चांदनी को , जाने क्यूँ लफ़्ज़ों मै न कह पाई. अश्क बहते हैं आज तक उसके,हम कहते उन्हें चाँद के दाग, इश्क हुआ था सदियों पहेले उसे, लगी है आज तक एक आग. सदियों तक बहें उसकी पलकें , भर गए सात समंदर, खोयी वही चांदनी है तू, इस चाँद सा मेरा दिल का मंज़र